Wednesday, 13 August 2025

शुक्रिया इंग्लिश मीडियम

 (एक माँ की व्यंग्यात्मक गाथा)


शुक्र है भगवान का,

थोड़ा सा दमख़म था जेब में,

थोड़ी सी हिम्मत बची थी रगों में,

भेज दिया बच्चे को इंग्लिश मीडियम में।


अब वो 'You always do this!' चिल्लाती है,

'You don't understand this!' दोहराती है,

और मैं...

बैठी हूं तजुर्बे और संस्कार के ढेर पर —

शब्दों की गोली नहीं लगती सीने पर।


'Shut the door while leaving!' जब कहती है वो,

तो "बाहर निकल जा, माँ!" जैसा दर्द

थोड़ा हल्का हो जाता है,

गूंज कम सुनाई देती है

उस विदेशी लहजे की लहर में।


अब वो ताने कसती है -

"Oh, you're not just playing oblivious, are you?"

और मैं मन ही मन मुस्कुराती हूँ,

कि ‘बेटा बढ़िया टोन पकड़ ली है!’

‘ग्रामर तो फिट बैठ रही है!’


अगर यही सब हिंदी में सुनती,

"तुम अनजान होने का नाटक कर रही हो!"

"तुम समझती ही क्या हो?"

तो शायद…

सीना छलनी हो जाता,

जैसे बाण लगे हों मर्म स्थल पर।


इसलिए हाँ,

थैंक्स टू इंग्लिश मीडियम!

अब डिक्शनरी निकाल लेती हूं

गालियों के बाद,

और तौलती हूँ –

क्या कहा, कैसे कहा,

कितना समझा…

और कितना "इग्नोर" किया जा सकता है।


इसीलिए जब वो

"I don't want to eat this!" कहती है,

मैं "कुछ और बना दूँ?" पूछ लेती हूँ

और जब वो “You intentionally mess with my food !" कहती है,

मैं सोचती हूं –

चलो, भावनाएं अभी भी जिंदा हैं।


कभी-कभी भाषा की दीवार,

दिल को बचा लेती है।

इंग्लिश में ये चोटें”

हिंदी जितनी गहरी नहीं लगतीं।

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