Wednesday, 13 August 2025

🌙 रात की शांति में

 हे ईश्वर,

आज का बोझ मैं आपके हाथों में रखती हूँ।

मेरे दिल की सारी थकान, सारे आँसू,

अब आपके आँगन में सुरक्षित हैं।


मेरे चारों ओर आपकी शांति है,

जैसे माँ की गोद का स्पर्श।

आप मेरे सपनों के पहरेदार हैं,

और मैं नन्हीं बच्ची बनकर सो रही हूँ।


मेरी हर साँस के साथ, मेरी चिंताएँ

समुद्र में लहरों की तरह दूर चली जाएँ।

मैं विश्राम में हूँ।

मैं सुरक्षित हूँ।

मैं ईश्वर की बाहों में हूँ।

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