Wednesday, 13 August 2025

बेगानी कर दी गई


जिस आंगन में मेरे पाँव के निशान थे,  

जिन दीवारों में मेरी सांसें कैद थीं,  

वहीं एक दिन दरवाज़ा बंद कर दिया गया,  

कह दिया — ये तुम्हारा नहीं है।  


मैंने किताबों के पन्नों में अपनी रातें बुन दी थीं,  

पर नाम के पन्ने से मेरा नाम मिटा दिया गया,  

और मैं खड़ी रह गई…  

अपने ही घर से, बेगानी होकर। 

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